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मनक जनम की मौज फेर नाहीं आवे / manak janam ki moj fer nahi aave

मनक जनम की मौज फेर नाहीं आवे 


साखी 


1- मानुष जनम दुर्लभ है , मिले ना दूजी बार । 

पक्का फल जो गिर पड़े , तो बहूरी ना लागे डार ।। 


भजन


टेक- थारी मनक जमारा की मौज फेर नहीं आवे 

म्हाने सद्गुरु मिल गया दयाल फेर कईं चावे ।। 


1- आसन पदम लगाय एक धुन लावे । 

म्हारी सुरत सुहागन नार , ज्ञान घर पावे ॥ 


2- उन मुन की सेरया में सूरत थारी जावे । 

वहाँ करोड़ो सुसीया भाण सुन्न घर पावे ।। 


3- त्रिवेणी के तीर संत कोई न्हावे हरिजन न्हावे । 

वहाँ कटे करम का किट पाप झड़ जावे । 


4-गुरु मिल्या घीसानाथ मोक्ष होई जावे 

वाने गावे गुणे हरीवर अमर घर पाये ।।


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