सद्गुरु शब्द परमाण
साखी
1- पृथ्वी अपहू तेज नहीं , नहीं वायु आकाश ।
अलख पंछी तहां रहे , सत शब्द परकास ॥
भजन
टेक- सद्गुरु शब्द परमाण अनहद वाणी उचरे ।
ओर झूठ सब ज्ञान कहे कबीर विचारिके ।
1 . ज्ञानी सुनहू संदेश शब्द विवेको पेखिया ।
करलो मुक्तिपुर देश , तीन लोके के बाहिरे ॥
2 . मन तह गगन समाय , धुनि सुनि सुनिके मगन हो ।
नहि आवे नहीं जाय , सुनि शब्द क्षिति पाव हो ।
3 . ज्ञानी करहू विचार सद्गुरु ही से पाईये ।
सत शब्द निज सार , ओर सबै विस्तार है ।
4 . जग में बहु परपंच , तामे जीव भुलान सब
नहीं पावे कोई सच सार शब्द जाने बिना ।।
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