चलना भाई चलना
साखी
1- पारख कीजे साधु की , साधु ही परखे कौन ।
गगन मण्डल में घर करे , अनहद राखे मौन ।।
भजन
टेक- चलना भाई चलना विलंब नही करना
झूठा है ये सब झगड़ा भाई मन रे ॥
खाली है यां सब भृमणा भाई मन रे
अगमपंथ का चलना ।
1- बिना हो पाल एक सरवर भरिया
उणा हो सरवर मे जाई के न्हावणा भाई मन रे
अगमपंथ का चलना हो जी ।
2- बिना हो मूल एक झरकट ठाडा
उणा हो झरकट से जाई कर मिलना भाई मन रे
अगम मारग सीधा चलना हो जी ।
3- गाजे ने घोरे वां बिंजूली सी चमके
बिना हो बादल मेवला बरसे भाई मन रे
अगम पंथ नरका चलना हो जी ।
4- हाथ हथेली का दिवला बणाया
बिना हो बाती के दिपक जलना ।
भाई मन से अगमपंथ का चलना हो जी ।
5- गुरु हो गोरखनाथ राजा भरथरी
पैला जुगत पिछे मुगत संतों रे
भाई अगर पंथ का चलना हो जी ।
आपको भजन अच्छा लगा हो या कोई त्रुटि दिखाई देती हो तो कमेंट करके जरूर बताये और blog को follow जरूर करे और आपको लिखित भजन एवं वीडियो social site पर भी मिल जायेंगे तो आप हमें वहाँ भी follow कर सकते है।
YOU TUBE - भजन वीडियो
FACEBOOK - FOLLOW
INSTAGRAM - FOLLOW
TELEGRAM - JOIN
TELEGRAM GROUP - JOIN
TWITTER - FOLLOW

0 टिप्पणियाँ