सात सहेलियाँ झूला दई
साखी
1- गगन मण्डल के बीच में बिना कलमकी छाप ।
पुरुष तहा एक रमिरहा , नहि मंत्र नहि जाप ।।
2- गुरु दरिया सुभर भरा , निभजे हीरालाल ।
मरजीवा ले निकसे पहने क्षमा की खाल ।।
भजन
टेक- साधु भाईरे गगन मण्डल झूला बांधिया रे
झूणो म्हारे सिरजन हो , भंवरा भाईला हो जी ॥
सात सहेलियाँ झूला दई रई हे नी
1- झूले म्हारो सिरजन हार मूल
गमायो इणा मुरखया ने जी
थारो जनम चौरासी में जाय भंवरा भाई ला हो जी ।
2- दो घोड़ा ने दो पारघी हो जी
उणा इणी मंदारिया रामाय
मूल गमायो इणा मूरखया ने जी
थारो जनम चौरासी में जाय भंवरा भाई ला हाजी ।
3- गगन मण्डल भाटी चौग मचेला जी
उड़ रही वो दूधड़ा री धार
सात सहेलियाँ प्याला फैर रही है जी
पिये म्हारा सिरजनहार भंवरा भायला हो जी
4- थारो जनम चौरासी में जाय भंवरा भएवो होजी ।
धार धार ( नर ) का चालना हो जी
पतखांडा की धार
धार चूके तो अणिया मार ले होजी
थारो जनम चौरासी में जाय भंवरा भाइला हो जी
5- पाट मांड रूपा बोलिया होजी
सुणो म्हारा सिरजन हार
मूल गमायो इणा मूरख याने जी
थारो जनम चौरासी में जाय भंवरा होनी ।
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