मिलो रे मिलो रे कोई म्हारा देस रा
साखी
1- लड़ने को सबही चले सस्तर बांधि अनेक ।
साहिब आगे आपने जुझेगा कोई एक ।
भजन
टेक- अरे भाई मिलो रे मिलो रे कोई म्हारा देसरा ।
दो दो बातां करांगा जी
1 . लकड़ लकड़ सब एक है
एक ही मालिक ने घड़िया
एक लकड़ी तो धूणी में जले
दूसरी ( नुगुरो ) महलां मां जड़िया
अरे भाई मिलो रे मिलो रे कोई म्हारा देसरा ।
दो दो बातां करांगा जी
2 . पत्थर पत्थर सब एक है
उना मालिक ने घड़िया
एक पथर की मूरत बनी
नुगुरो ( दूजो ) सीढ़ी में लगिया जी ॥
अरे भाई मिलो रे मिलो रे कोई म्हारा देसरा ।
दो दो बातां करांगा जी
3 . धरती माता रा चूल्हा किया
आसमान किया है कड़ेला
इ तो चारी जुगरा झोंकन दिया
धुंआ गगन समाणा जी ॥
अरे भाई मिलो रे मिलो रे कोई म्हारा देसरा ।
दो दो बातां करांगा जी
4 . दोई कर जोड़ गोरख बोलिया
पाया बैकुंठ वासा
इतो जिन ने रटिया सत ( निज ) नाम को
वोई नर संत सुजाना ( पहुंच सत्त धाम ) ।।
मालवी शब्द
घड़िया - घड़ना , बनाना
कडेला - मिट्टी का तवा जिस पर रोटी बनाते हैं ।
झोंकण - चूले में लकडी लगाना
रटिया - रटना , पार करना
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