Header Ads Widget

Ticker

6/recent/ticker-posts

म्हारा सतगुरु बणिया भेदिया / mhara satguru baniya bhediya

म्हारा सतगुरु बणिया भेदिया


साखी


1- गूंगा हुआ जीभ से , बहरा हुआ है कान । 

पावन ते पंगुला भया , सतगुरू मारा बाण।।


2- ज्ञान कमल फूलो गुरू , तन तरकश मन तीर

झलक बहे तत सार का , मारा हलक कबीर ।।


भजन


टेक- म्हारा सतगुरू बणिया भेदिया , म्हारी नाड़ी रे पकड़ी हाँ । 

उन नाड़ी में लहर उपजे हियो हिलोरो खाय

गुरु म्हाने ज्ञान दईग्याई 

म्हारे तन बिच दियो लखाय सुमिरन चेतन कर गिया।


1- म्हारा सतगुरू आँगन रूखड़ी , लीजो रे सब कोय

अवगुण ऊपर गुण करें , म्हारा सभी पाप झड़ि जाय ।

गुरू म्हने चेतन कर गया । 

म्हारे तन बिच दियो लखाय सुमिरन चेतन कर गिया।


2- म्हारा सतगुरू सोना सोलमों रति नी लागे कांई ( दाग ) 

सतगुरू भाला रोपिया , म्हारें लगे कलेजारे माय

गुरू म्हारे घायल करि गिया ॥

म्हारे तन बिच दियो लखाय सुमिरन चेतन कर गिया।


3- भाव रूख फैले घणो रे , फैली रहयो चौ फेर

भरी सभा में बांट जोऊँ म्हारी आनंद सभा में बाट जो 

ऊँ म्हारा बंटया घणेला होय ॥ गुरू म्हारे घायल करि गिया ॥

म्हारे तन बिच दियो लखाय सुमिरन चेतन कर गिया।


4- अरे मन मोइनो चोर लो , सूरता रो करलो तार

सेवा गुरू अमृत को प्यालो , दियोजी म्हाने पिलाय

गुरू म्हारे घायल करि गया । 

म्हारे तन बिच दियो लखाय सुमिरन चेतन कर गिया।


मालवी शब्द

हिकोरो - हिलोर , लहर उमंग । 

रूखड़ी - जड़ दवाई


संक्षिप्त भावार्थ - इसमें संतों की चितावणी है सतगुरु के आंगण में वह जड़ी दवा है , नाम की , सतकाम की जिससे सभी रोग कटते हैं जिसमें कोई काई या दाग नही लगता।बेदाग है पर नतु यह स्थिति तब बनेगी जब कोई शब्द की चोंट अंतर मेला । और हम अंतर से घायल हो जाएं और उस भाव की प्रेम की लहर के जरिये प्याला सबको पिला सकें ।


आपको भजन अच्छा लगा हो या कोई त्रुटि दिखाई देती हो तो कमेंट करके जरूर बताये और blog को follow जरूर करे और आपको लिखित भजन एवं वीडियो social site पर भी मिल जायेंगे तो आप हमें वहाँ भी follow कर सकते है। 


YOU TUBE    -     भजन वीडियो

FACEBOOK   -     FOLLOW

INSTAGRAM  -    FOLLOW

TELEGRAM    -     JOIN

TELEGRAM  GROUP  -  JOIN

TWITTER       -     FOLLOW

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ