लेरे नाम लेरे नाम
साखी
1- नाम लेत कुष्ठी भला , पड़ - पड़ चूवे चाम ।
कंचन देह किस काम की , जा मुख नाही नाम ।।
2- नाम लेत कन्या भली , साकिट भला न पूत ।
बकरी के गले गलथना , जामें दूध न मूत।।
भजन
टेक- ले रे नाम ले रे नाम - नाम से तरे रे भाई
मनक जमारो थारे फिर न मिले ।
1- नुगरा के माला दई दी फेंकतो फिरे
अज्ञानी के ज्ञान दईद्यो तो बकतो फिरे ।
ले रे नाम ले रे नाम - नाम से तरे रे भाई
मनक जमारो थारे फिर न मिले ।
2- बांदरा के हीरा मिल गयो तो घट्टी में दले
केशर कस्तुरी लई ने तेल में तले ॥
ले रे नाम ले रे नाम - नाम से तरे रे भाई
मनक जमारो थारे फिर न मिले ।
3- टोली को बिछुड़ो हरनो एकलो फिरे
मंडली को संग बिछड़यो चौरासी फिरे ॥
ले रे नाम ले रे नाम - नाम से तरे रे भाई
मनक जमारो थारे फिर न मिले ।
4- बिच्छू का मंतर नहीं जाणे काला से अड़े
अनुभव से मै यों कहे सतनाम से तिरे ।।
ले रे नाम ले रे नाम - नाम से तरे रे भाई
मनक जमारो थारे फिर न मिले ।
5- त्रिकुटी महल में वा जोत जले
कहै कबीर सच्ची सैण से मिले ।
ले रे नाम ले रे नाम - नाम से तरे रे भाई
मनक जमारो थारे फिर न मिले ।
मालवी शब्द
मनक जमारो - मनुष्य योनि ।
नुगरा - बिच गुरु का
बकतो - चिल्लाना , कहना ।
बिछड्यो - खोना , बिछुड़ना ।
संक्षिप्त भावार्थ- इस पद में नाम की शब्द की महिमा करते हुए जो मानव सतनाम , सतकाम से सतसंगति से वंचित रहते हैं उनकी दशा को दर्शाया है जो आनता , नासमझी की वजह से जीवन के यथार्थता से वाकिफ नहीं हो पाते है , .जो सच्ची सैण शाश्वत है ।
आपको भजन अच्छा लगा हो या कोई त्रुटि दिखाई देती हो तो कमेंट करके जरूर बताये और blog को follow जरूर करे और आपको लिखित भजन एवं वीडियो social site पर भी मिल जायेंगे तो आप हमें वहाँ भी follow कर सकते है।
YOU TUBE - भजन वीडियो
FACEBOOK - FOLLOW
INSTAGRAM - FOLLOW
TELEGRAM - JOIN
TELEGRAM GROUP - JOIN
TWITTER - FOLLOW

0 टिप्पणियाँ