साखी - जंत्र बजावत हम सुना
और टूट गए सब तार
तार बिचारा क्या करे
जब गया बजावन हार
भजन
हंसा निकल गया काया से
खाली पड़ी रही तस्वीर || टेक ||
|| 1 || यमदूत जब लेने को आये
थोड़ी धरे न धीर
मार मार के प्राण निकाले
आँखों से बरसे नीर
हंसा निकल गया काया से
खाली पड़ी रही तस्वीर
|| 2 || कोई रोवे कोई मल-मल धोवे
कोई उढावे चीर
चार जणा मिल तुझे उठाये
ले गए गंगा तीर
हंसा निकल गया काया से
खाली पड़ी रही तस्वीर
|| 3 || बहुत मनाया देवी देवता
बहुत मनाया पीर
आया परवाना मालिक घर का
जाना पडे आखीर
हंसा निकल गया काया से
खाली पड़ी रही तस्वीर
|| 4 || धन दौलत की याद सतावे
संग नहीं जावे ये शरीर
जाए मरघट में चिता जलावे
कह गये दास कबीर
हंसा निकल गया काया से
खाली पड़ी रही तस्वीर
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