Header Ads Widget

Ticker

6/recent/ticker-posts

देखहूँ जग बोराना / dekhahu jag borana

साखी - राम रहीमा एक है , मत समझो कोई दोय ।

अन्तर टाटी भरम की , यासे सूझे दोय ॥1 ॥ 


 ' देखहूँ जग बोराना '


भजन


टेक - साधु देख हूँ जग बोराना  

सांच कहुँ तो मारन धावे झूठा जग पतियाना रे साधु 

देखहुँ जग बोराना ॥ 


1. हिन्दु कहता राम हमारा , मुसलमान रहमाना

आपस में दोऊलड़ - लड़मरता , मरम काहून नहि जाना॥ 


2. बहुतक देखा नेमी धरमी , प्रात : करे असनाना 

आतम छोड़ पाषाण ही पूजे , उनका थोथा है ज्ञाना ॥ 


3. आसन मार डिम्ब घर बैठे , मन में बहुत गुमाना 

पीतर पाथर पूजन लागे , तीरथ बने है भुलाना ।। 


4. माला पहरे टोपी पहरे , छाप तिलक अनुमाना 

साखी शबदे गावत भूले , आतम खबर न जाना ॥  


5. घर - घर मंतर देत फिरत है , महिमा के अभिमाना 

गुरूवा सहित सब शिष्य ही डूबे , अन्तकाल पछताना ॥ 


6. बहुतक देखे पीर ओलिया , पढ़े किताब कुराना 

करे मुरीद कवर बतलावे , उनहुँ खुदा न जाना ॥ 


7. कहत कबीर सुनो भाई साधो ई सब भरम ' भुलाना । 

कहाँ लग कहूँ कह्यो नहीं माने , आपही आप समाना ॥ 



मालवी शब्द 

1.भरम - ना समझो , धोखा 

2- सुझे - दिखना है । 


संक्षिप्त भावार्थ - सद्गुरु कबीर जाति धरम व मजहबी , पाखण्डवाद के धोखे से बचने के लिए चेतना देते हैं और सत्य साँचजो देखासोकहकर मानवमें आपसी प्रेमभावको स्थापित करते हैं व बाह्य  आइम्बार से मुक्तकर निजस्वरूप आत्मबोधकी ओर प्रेरित करते है || 


आपको भजन अच्छा लगा हो तो कृपया कमेंट करके जरूर बताये कुछ गलती हो तो वो भी बताये। 

हमें सोशल मीडिया पर भी फॉलो करे जहाँ पर आपको ये भजन सुनने व पड़ने को मिलेंगे। 


YOU TUBE   -   भजन वीडियो

FACEBOOK    -   FOLLOW PAGE

INSTAGRAM    -   FOLLOW PROFILE

TELEGRAM CHENNEL  -   JOIN CHANNEL

TELEGRAM GROUP   -   JOIN GROUP




एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ