' अमल करे सो पाई '
साखी - जानता बूझता नहीं , बूझ किया नहीं गौन ।
अंधे को अंधा मिला , राह बताने कौन ।।
भजन
अमल करे सो पाई रे साधु भाई अमल करे सो पाई ।
जब लग अमल नशा नहीं करता , तब लग मजा न आई ।।
1 . आंदो हाथ लिये कर दीपक , कर परकास दिखाई ।
औरों के आगे करे चांदनो , आप अंधेरा का माई ॥
2 . आंदो आप अन्दर नहीं दरसे ' , जग में भलो कहाई ।
दूध - पूत रा दानी रे बनके पाखंड पेट भराई ।
3 . काजी - पंडित पच - पच हारे , वेद कुरान के माई ।
भण्या रे गुण्या दोनों रे भूलिया याने कुण समझाई ॥
4 . गुरू शरणों में माली लिखें लिखमो , सब संतों के मन भाई
है कोई ऐसा फक्कड जग में , जो अपणो अमल जमाई ॥
मालवी शब्द
1.अमल - एक प्रकाशनशा व्यवहारिक जीवन में व्यवहारिक जीवन में उतारना
2. आंदो - अंधा ,
3. चांदणो - प्रकाश ,उजाला ,
4 . दरो - दिखाना ,
5. कुण - कौन .
6. अपणो अपना ,
7.ओरां - दूसरों को
8. पाखण्ड - धोखाधड़ी ,
9. क्रियान्वित करना ।
संक्षिप्त भावार्थ - इसमें संत साधकमाली लिखमोजी कहते हैं कि जब तक इंसान व्यवहारिक जीवन में स्वयं अच्छी सोच व कार्य को नहीं करे और दूसरों को समझ व ज्ञान बांटता रहे यह वैसा है जैसे अंधा व्यक्ति दूसरे को प्रकाश दिखाये । इसलिए पाखण्ड जो स्वयं के हित व स्वार्थ के लिए निर्मित किए हैं । दूर कर झूठी मान्यता से मुक्त होकर अपने निज अनुभव पर ठहरे ।

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