1 - एक क्या है ?
- एक ब्रह्म ही सत्य है
- एक ब्रह्म ही अनित्य है
- एक ब्रह्म ही सर्व का आदि अंत है।
2-दो क्या है ?
- दो सम्पदा - दैवी और आसुरी
- दो उपासना - सगुण और निर्गुण
- दो भक्ति - सकाम और निष्काम
- दो मार्ग - प्रवृत्ति मार्ग और निवृत्ति मार्ग।
3-तीन क्या है ?
- तीन ताप - अध्यात्म , अधिदेव और अधिभूत
- तीन अध्यात्म - इन्द्रियाँ , देवता और विषय
- तीन दोष - मल , विक्षेप और आवरण
- तीन अवस्था - जाग्रत , स्वप्न और सुषुप्ति
- तीन कर्म - संचित , क्रियमाण और प्रारब्ध
- तीन जीव - विश्व , तेजस और प्राज्ञ
- तीन काण्ड - कर्मकाण्ड , उपासना काण्ड और ज्ञान काण्ड
- तीन नाड़ी - इंगला , पिंगला और सुषमणा
- तीन प्राणायाम - रेचक , पूरक और कुम्भक।
4 - चार क्या है ?
- चार वर्ण - ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य और क्षुद्र
- चार आश्रम - ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ और सन्यास
- चार अवस्था - जाग्रत, स्वप्न , सुषुप्ति और तुरिया
- चार अंतःकरण - मन , बुध्दि , चित और अहंकार
- चार सृष्टि - जरायुज , उद्भिज , अण्डज और स्वेदज
- चार वाणी - परा , प्रशंती , मध्यमा और बैखरी
- चार वेद - ऋग्वेद, यजुर्वेद , सामवेद और अथर्ववेद
- चार महाकाव्य - प्रज्ञानंदबर्ह्म , अहंब्रह्मास्मि , तत्वमसि और अयमात्माब्रह्म
-चार पद - तवंपद , तत्पद , असीपद और तुरीयपद
- चार पद - सत्यपद , तत्पद , ब्रह्मपद और अवाच्यपद
- चार साधन - विवेक , वैराग्य , षटसम्पति और मुमुक्षता
- चार योग - हठयोग , लययोग , मंत्रयोग और राजयोग
- चार विभु - विश्व , तेजस , प्राज्ञ और प्रत्येक आत्मा
- चार शरीर अवस्था - बाल , तरुण , वृद्ध और देव अवस्था
- चार पुरुषार्थ - अर्थ , धर्म , काम और मोक्ष
- चार मुक्ति - सालोक्य , सामीप्य , सारूप्य और सायुज्य।
5- पाँच क्या है ?
- पाँच तत्व - आकाश , वायु , अग्नि , जल और पृथ्वी
- पाँच विषय - शब्द , स्पर्श , रूप , रस और गंध
- पाँच प्राण - प्राण, अपान , व्यान , समान और उदान
- पाँच उपप्राण - नाग , कूर्म , कृकल , देवदत्त और धनंजय
- पाँच कर्मेन्द्रियां - मुख , हाथ , पैर , लिंग और गुदा
- पाँच यम - अहिंसा , सत्य , ब्रह्मचर्य , अपरिग्रह और अस्तेय
- पाँच नियम - शौच , संतोष , तप , स्वाध्याय और ईश्वर प्रणिधान
- पाँच कोश - अन्नमय , प्राणमय , मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय
- पाँच क्लेश - अविद्या , राग , द्वेष , अस्मिता और अभिवेश
- पाँच अनुभव - प्रोक्ष , अप्रोक्ष , द्रढ़ , अद्रढ़ और महाद्रढ़
- पाँच ख्याति - असत्ख्याति , आत्मख्याति , अन्यथाख्याति , अख्यातख्याति और अनिवर्चनीय ख्याति
- पाँच भ्रान्ति - भेद भ्रान्ति , कर्ता भोक्तापन की भ्रान्ति , संगभ्रान्ति , विकार भ्रान्ति , और ब्रह्म से भिन्न जगत के सत्यता की भ्रान्ति।
- पाँच ज्ञान - मतिज्ञान , श्रुतिज्ञान , बोधज्ञान , मन प्रजयज्ञान और केवलज्ञान
- पाँच मुद्रा - खेचरी , भूचरी , चाचरी , अगोचरी और उनमुनि।
6- छः क्या है ?
- छः अनादि - शुद्ध ब्रह्म , ईश्वर , जीव , प्रकृति और ईश्वर का संबंध , और जीव ब्रह्म का भेद
- छः - शास्त्र - न्याय , शांख्य, वैशेषिक , पूर्व मीमांसा , योग , और उत्तर मीमांसा
- छः उर्मि - जन्म , मरण , क्षुधा , तृषा , हर्ष और शोक
- छः विकार - जन्म , अस्मिता , वृद्धि , वि - परिणाम , अपक्षय और विनाश
- छः राग - भैरव , मालकोष , हिंडोल , दीपक , श्रोराग और मेघ
- छः योग क्रिया - नेति , धोती , बस्ती , नवली , त्राटक और गज
- छः भ्रम - कुल भ्रम , गोत्र भ्रम , जाती भ्रम , वर्ण भ्रम , आश्रय भ्रम और नाम भ्रम
- वेदो के छः अंग - शिक्षा , कल्प , व्याकरण , निरुक्त , छंद और ज्योतिष
- वेदो के छः उपअंग - न्याय , मीमांसा , वैशेषिक , पातंजलि , सांख्य और वेदांत
- छः शरीर - स्थूल, सूक्षम , कारण , महाकारण , केवल और हंस
- छः भवर गुफा के नाम - वेहद , निरधारी , मुक्तिपद , उनमुनि , हरिहद और अधर
- छः त्रिकुटी के नाम - रुकमंदर , बली विजय , मुकरमनी , शब्दनी, गोमती और हंसमुखी।
7-सात क्या है ?
- सात धातु - रस , रक्त , मांस , मेद , अस्ति , मज्जा और शुक्र
-सात समुद्र - सूरा , घृत , ईख , दधि , शहद, क्षीर और खार
- सात द्वीप - जम्बू , पलक्ष , शालम , कुश , कोंच , शाक और पुष्कर
- सात लोक - भूः , भुवः , स्वः , महः , जनः , तपः और सत्यम
- सात चेतन - ईश्वर , जीव , शुद्ध चेतन , प्रमाता चेतन , प्रमाण चेतन , प्रमेय चेतन और प्रमा चेतन
- सात अज्ञान भूमिका - विक्षेप , आवरण , प्रोक्ष , अप्रोक्ष , मोक्ष , निरंकुसा और शोक निवृत्ति।
8- आठ क्या है ?
- आठ मद - कुलमद , शीलमद , धनमद , रुपमद , यौवनमद , विद्यामद , तपमद ,और राजमद
- आठ मैथुन - स्मरण , दर्शन , केलि , गुह्य भाषण , संकल्प , अध्यवसाय , और क्रिया निवृत्ति
- आठ सिद्धि - अणिमा , महिमा , लगिमा , गरिमा , प्राप्ति , प्राकाम्य , ईशत्व और विशित्व
- आठ वसु - पृथ्वी , जल , अग्नि , वायु , आकाश , सूर्य , चंद्र और दिशा
- आठ योगांग - यम , नियम , आसन , प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान और सविकल्प समाधी
- आठ पूरी - पंच ज्ञानेन्द्रिय , पंच कर्मेन्द्रिय , चार अंतःकरण , पंच प्राणपुरी , पंचभूत पूरी , कामक्रोधादि पुरी , त्रिविधकर्मपुरी , त्रिविधवासनापुरी
9- नौ क्या है ?
- नौ निधि - घर , धरा , वित्त , सुत , कनक , कामिनी , दास , दासी एवं अन्न भंडार
- नवधा भक्ति - श्रवण , कीर्तन , स्मरण , पदसेवा , अर्चन , वंदन , दास्य , सख्य और आत्म निवेदन
- नौ लहरियां - ज्ञाता , ज्ञान , ज्ञेय , भोक्ता , भोग , भोग्य , कर्ता , कर्म और क्रिया
- नौ द्वार - दो कान , दो नेत्र , दो नासिका , मुख , लिंग और गुदा
- नौ खण्ड - भरत खण्ड , पर्व खण्ड , निराकार खण्ड , यक्षपाल खण्ड , केतुपाल खण्ड , इलावृत खण्ड , पृथु खण्ड , मणिखण्ड , और सुवर्ण खण्ड
10-दस क्या है -
- धर्म के दस लक्षण - धृति , क्षमा , दम , अस्तेय , शौच , इन्द्रियनिग्रह , धोर , विद्या , सत्य और अकोध
- दसनाड़ी - इंगला , पिंगला , सूक्ष्मणा , गांधारी , हस्तिना , पुर्षा , अश्विनो , अलंबुका , शंखिनी , और कुंडलिनी
- दस इन्द्रियाँ - हाथ , पैर , मुख , लिंग , गुदा , नयन , नाक , जबान , कान और त्वचा
11- ग्यारह क्या है ?
- ग्यारह परणात्मा - दस प्राण तथा एक जीवात्मा - इस तरह दोनों मिलकर ग्यारह परणात्मा कहलाते है।
- ग्यारह रूद्र - अज , पिनाकी , महेष्वर , शम्भू , वृषाकपि , ईश्वर , एपति , अहिंवृधन , अपराजित , त्र्यंबक और हर।
12- बारह क्या है ?
- बारह हिंदी महीने - चैत्र , बैशाख , ज्येष्ठ , आषाढ़ , श्रावण, भादो , आश्विन , कार्तिक , मार्गशीर्ष , पौष , माघ और फाल्गुन
- बारह अंग्रेजी महीने - जनवरी , फरवरी , मार्च , अप्रैल , मई , जून , जुलाई , अगस्त , सितंबर ,
- बारह मुसलमानी महीने - मोहर्रम , सफर , रविउल अव्वल , रविउस्सानी , जमादिउल अव्वल , जमादिउस्सानी , रज्जब , साबान , रमजान , शब्बाल , जिल्काद ,और जिलहिज
- बारह धर्म अनात्म के - अनित्य , विनाशी , अशुद्ध , नाना , क्षेत्र , आश्रित , विकारी , प्रकाश , हेतुवान , अव्यापक , संगी और आवर्त
13- तेरह क्या है ?
- तेरह बारिया - दो कान , दो आँख , दो नाक के छेद , दोनों स्थन , एक मुख , एक नाभि , एक लिंग , एक गुदा , और एक तालु , इस तरह कुल मिलाकर तेरह हुये , इन्हे ही शरीर की तेरह बारियो के नाम से पुकारते है।
14-चौदह क्या है ?
- चौदह लोक - निचे के सात लोक - अतल , वितल , सुतल , तलातल , रसातल , भूतल और पाताल
ऊपर के सात लोक - भूः , भुवः , स्वः , महः , जनः , तपः और सत्यम। इस प्रकार चौदह लोक पुकारे जाते है। मुसलमान इसे तबक कहकर पुकारते है।
- चौदह विद्या - ब्रह्मज्ञान , रसक्रिया , काव्य , वेद ,ज्योतिष , व्याकरण , धनुर्विद्या , जल में तैरने की विद्या , संगीत , वैद्यक , अश्वारोहण , कोक विद्या , नाटक , और चातुर्य
- चौदह त्रिपुटी - १ - मन का देवता चन्द्रमा , २-बुद्धि का ब्रह्मा , ३- चित्त का वसुदेव ४-अहंकार का रूद्र ५-नेत्र का सूर्य ६- कान का दिग्पाल , ७- नासिका का अश्विनी कुमार , ८- जिव्हा का वरुण , ९- त्वचा का वायु , १०- हस्त का इंद्र , ११-पाद का विष्णु , १२- गुदा का यम , १३-उपस्थ का प्रजापति और १४- मुख का अग्नि है।
16- सोलह क्या है ?
- सोलह गगन के नाम - तिशाधर , पृथ्वी पद , विरछसुर , दिलंबी , हिरापद , निरंजन , पुलंधर , सफानल , कलिक कंद , धुंध , जमरम , हरिह्यदे, प्रधर , कलंगी , अक्ति , और गुप्त
- सोलह कला - हिरण्यगर्भ , श्रद्धा , आकाश , वायु , तेज , जल , पृथ्वी , दशेंद्रियां , मन , अन्न , बल , तप , मन्त्र , कर्म , लोक और नाम।
17- सत्रह क्या है ?
- लिंग शरीर के सत्रह तत्व - श्रवण , त्वचा , नयन , जिव्हा , नासिका , मुख , हस्त , पाद , उपस्थ , गुदा , प्राण , अपान , व्यान , समान , उदान , मन और बुद्धि।
18- अठारह क्या है ?
- अठारह पुराण - ब्रह्मपुराण , पद्मपुराण , विष्णुपुराण , शिवपुराण , भागवतपुराण , नारदपुराण , सूर्यपुराण , अग्निपुराण , भविष्यपुराण , ब्रह्मवैवर्तपुराण , लिंगपुराण , बराहपुराण , स्कन्धपुराण , बावनपुराण , कूर्मपुराण , मत्स्यपुराण , गरुड़ पुराण , और ब्रह्माण्ड पुराण।
21- इक्कीस क्या है ?
- ब्रह्माण्ड के इक्कीस नाम - बारी , भूत , जख , कानर , ब्रह्म , काल , चित्रगुप्त, योगिनी , गंधक , अर्जमान , महः , तपः , जनः , सत्यं , दिव्य , देव , सूखा , पियाली , विश्वकर्ण , राक्षस और कर्मा
24-चौबीस क्या है ?
28- अट्ठाइस क्या है ?
- अट्ठाइस नक्षत्रो के नाम - अश्विनी , भरणी , कृतिका , रोहिणी , मृगशिर , आर्दा , पुनर्वसु , पुष्य , अश्लेषा , मघा , पूर्वा फाल्गुनी , उत्तरा फाल्गुनी , हस्त , चित्रा , स्वाती , विशाखा , अनुराधा , ज्येष्ठा , मूल , पूर्वाषाढ़ा , उत्तराषाढ़ा , अभिजीत , श्रवण , धनिष्ठा , शतभिषा , पूर्वाभाद्रपद , उत्तराभाद्रपद , और , रेवती
- ज्ञान के अट्ठाइस लक्षण - निरालम्ब , निर्भ्रम , निर्वासिक , निर्पक्ष , निर्विकार , निर्मोह , निर्बंध , निशंक , निर्वाण , सावधान , संतोषी , स्थित , निष्प्रपंच , नतरंग , निष्कर्म , निर्लिप , शीलवन्त,सत्यवादी , समाधि , शुद्ध , सवंगी , सारग्रही , अयाचक , अनामी , सुखदायक ,दयावन्त , सुमति स्वभाव , और अनुभव विचार।
32- बत्तीस क्या है ?
- बत्तीस नाल के नाम - अभया तेज , हंस , कनक , विकट , धुंधर , रुपरस , स्वेत , अभयामते , सुकर्मा , हरिसंग्रह , सूक्त मणि , पोपट , निकटनट , नरबर , गगन , सुखमनी , अनूप , विलमसुर, भंवर , अर्जिक , हंसदे , शक्ति अंकित , नगर , भीष्म , पदमसुर , गढ़ गोधर , त्रिकुण्ठ , श्वेतद्वार , सिख , अधररस , श्रुति कमल , और बरणी।
36- छत्तीस क्या है ?
- नीर के छत्तीस नाम - अजित , कर्त्ता , अनूप , मुक्ति , पुरयनी , अम्बुज , निशियाभर , अटला , नाटक , मनछेदता , काल , जीवयापन , पुरुषध्वान , जीव , भीर , कनककर , रुपरस , बलदे , कुषंभ , कलंगी , सुखसागर , मूलघट , निरासु , चतुर , मेघ , काल , घनसुर , रुपदे ,अभेय द्रग , अहिबल , अहिसंसार , निर्गुण , आलस्य , सरोसिल , पृथ्वी , कामनी।
85- पिच्यासी क्या है ?
- पवन के पिच्यासी नाम - रजलाय , केदार , निलन , समीर , पुरभो , कालूल , श्रुती अंध , नलपति , ब्रह्मराज , मनदोष , सबलतेज , मनसोत , जगजोत , उपजीत , जगजीत , परराज , थलकुम्भ , तवरोज बलभेद , बरुण , कुवेर , जगजाय , वधुंध , सकलन्ध , सकलशोप ,सुखरोग , ज्ञानकुम्भ , मेनाउध , त्रिकोध , किवलास , करनास , रसनाग , तनजीत , सकसीत , बेलोक , मनशोक , बेरूप , सतसुख , बीजबंध , अजसार , सिवाल , शब्दाल , गिरनाल , सुखलय , पान , बिदान , सुभपति , धरती , तरति , तितरंत ,पूर्वी , सर्वो , बमित , दरदित , उपमार , अभियार , अतिरित , तोइत , सुष्मद , असमद , नद , सिराद , लेआद , करीहाठ , कुरुनाट , बैराग ,लेजार , लेलार , नंदसूर , पदसुर , करकित , धरजीत , मनमास , सरसत, अनधुत , आकाश , जगवास , सुनसुत , मनभुत , कापी , मतसार ,आसोग , तभोग , जगजोग , मनरोग।

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