टेक- बलिहारी जाऊँ सतगुरु ने
मेरो दियो भृम सब खोय ।।
1- प्रेम सागो जद जाणिये
बिना प्रेम मिलणो न होय ।
बलिहारी जाऊँ सतगुरु ने
मेरो दियो भृम सब खोय ।।
2- घाव लागे जद जाणिये
बिना घाव दरद न होय ।
बलिहारी जाऊँ सतगुरु ने
मेरो दियो भृम सब खोय ।।
3- बिखमी घाटी चढ़णों सूरा
बिन चढ़यो न कोय ।
बलिहारी जाऊँ सतगुरु ने
मेरो दियो भृम सब खोय ।।
4- कहे कबीर धर्मिदास ने
गुरु बिन मुक्ति न होय ।
बलिहारी जाऊँ सतगुरु ने
मेरो दियो भृम सब खोय ।।
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