Header Ads Widget

Ticker

6/recent/ticker-posts

लहरी अनहद उठे घट भीतर / lahri angad uthe ghat bhitar

लहरी अनहद उठे घट भीतर


साखी 


1- अगम गहे अरू अकह कहे , अनहद भेद लहाय ।

अनभै वाणी अगम की , ले गये संग लगाय।।


2- हर्ष शौक वा घर नहीं , नहीं लाभ नहीं हानि ।

हंसा परमानंद में , धरे पुरूष को ध्यान ।।.


भजन 


टेक- लहरी अनहद उठे घट भीतर फैली रही चौफैरी

दीवाने लागी भजन धुन गहरी ।।


1 . बिना मूल एक झरखट ठाड़ा , पान फूल बिन पहरी

साखा पत्र कछु नहीं वाके फैल रहा चौ फेरी रे ।।

दीवाने लागी भजन धुन गहरी ।।

लहरी अनहद उठे घट भीतर फैली रही चौफैरी

दीवाने लागी भजन धुन गहरी ।।


2 . उल्टा बाण गगन जई लागा वा बिच है एक डेरी

ऊणी हो डेरी में मेरे साहेब बिराजे वहाँ पर लागी लव मेरी ॥

दीवाने लागी भजन धुन गहरी ।।

लहरी अनहद उठे घट भीतर फैली रही चौफैरी

दीवाने लागी भजन धुन गहरी ।।


3 . उणी डेरी में ऐसा बाजा बाजे , बाजी रहा आठो पहरी

मरदंग ताल पखावज बाजे , मुरली बाजे घणी गहरी ।। 

दीवाने लागी भजन धुन गहरी ।।

लहरी अनहद उठे घट भीतर फैली रही चौफैरी

दीवाने लागी भजन धुन गहरी ।।


4 . नौ सो नदियाँ निन्यानु सौ नाला , बह रहा आठो पहरी

आसपास रत्नागर सागर , बीच में अमृत डेरी ॥

दीवाने लागी भजन धुन गहरी ।।

लहरी अनहद उठे घट भीतर फैली रही चौफैरी

दीवाने लागी भजन धुन गहरी ।।


5 . सदगुरू के परताप सुमिरलो , पाई अगम की सैरी

कहें कबीर सुणो भई साधो , निरगुण माला फेरी ।।

दीवाने लागी भजन धुन गहरी ।।

लहरी अनहद उठे घट भीतर फैली रही चौफैरी

दीवाने लागी भजन धुन गहरी ।।


मालवी शब्द

झरकट - पेड़ , वृक्ष


संक्षिप्त भावार्थ - इस पद में साहब ने अगम का संदेश निर्गुण रूपी माला के जरिये जो हमेशा  स्वतःहर इंसान के घर में अखण्डित नाद धुन की सुरीली आवाज के रूप में बजती है जिसका दीदार कोई शब्द रूपी बाण लगने पर अंतर में पलटने पर संभव है ।


आपको भजन अच्छा लगा हो या कोई त्रुटि दिखाई देती हो तो कमेंट करके जरूर बताये और blog को follow जरूर करे और आपको लिखित भजन एवं वीडियो social site पर भी मिल जायेंगे तो आप हमें वहाँ भी follow कर सकते है। 


YOU TUBE    -     भजन वीडियो

FACEBOOK   -     FOLLOW

INSTAGRAM  -    FOLLOW

TELEGRAM    -     JOIN

TELEGRAM  GROUP  -  JOIN

TWITTER       -     FOLLOW

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ