साखी
1-घट में औघट पाईया , औघट माहि घाट ।
कहे कबीर परिचय भया गुरु दिखाई बाट ।
2-सतिया का सुख देखना जले पिवके संग ।
आगे आग लगात है तऊना मोड़े अंग ॥
3-पतिव्रता पीहर बसे नित उठ पति को ध्यान
कहे सुणे लाजे मरे ऐसो आतम ज्ञान ॥
भजन
हेली म्हारी ! सुरता को करणो है ब्याह
सुरता को करणो है ब्याह जोड़ी का बनड़ा ना मिल्या । हो जी ॥
हेली हारी ! मिल्या मिल्या लोग हज़ार
मिल्या मिल्या लोग हज़ार उन से तो दिलड़ो ना मिल्यो । हो जी ॥
हेली म्हारी ! विपत बिरामन बुलावजो
विपत बिरामण बुलावजो लगना जचाओ रे , हो जी ॥
हेली म्हारी ! छोड़ी दूंआ मामा मोसाल
छोड़ी दूंआ मामा मोसाल पिया की लारां होई जाऊं , हो जी ।।
हेली म्हारी ! चढ़ी जाऊं या औघट घाट
चढ़ी जाऊं या औघट घाट काया गढ़ के छेकी जाऊं । हो जी ॥
हेली म्हारी ! वां खुला है दसमां द्वार
वां खुला है दसमां द्वार साहिब जी से जई मिलूं वा ।। हो जी ॥
हेली म्हारी ! सुरता को कर दीन्हो ब्याह
सुरता को कर दीन्हो ब्याह जोड़ी का बनड़ा वां मिल्या ॥ हो जी ॥
हेली म्हारी ! कहे कबीर धरमदास से
कहे कबीर धरमदास रटो निज नाम के ॥ हो जी ॥
YOU TUBE - भजन वीडियो
FACEBOOK - FOLLOW PAGE
INSTAGRAM - FOLLOW PROFILE
TELEGRAM - JOIN GROUP
CHANNEL - CHANNEL
TWITTER - FOLLOW PROFILE


0 टिप्पणियाँ