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भरा सत्संग का दरिया भजन लिरिक्स / bhara satsang ka dariya bhajan lyrics

भरा सत्संग का दरिया भजन लिरिक्स / bhara satsang ka dariya bhajan lyrics

कबीर भजन लिरिक्स 

 दोहा-सत्संग बड़ा संसार मे करो धारणा धार

महापाप से छूट के हो जावो भवसे पार

2-सत्संग की आधी घड़ी आधी में पुनिआद

तुलसी संगत साध की कटे कोट अपराध

भजन

मुखड़ा- भरा सत्संग का दरिया 

नहालो जिसका दिल चाहे

नहालो जिसका दिल चाहे

 नहालो जिसका दिल चाहे 

जिगर से दाग पातक का

 छुडालो जिसका दिल चाहे।

भरा सत्संग का दरियाव


1-हजारों रत्न ये कीमत

 भरे आले से आले है

लगा उसमे जरा गोता 

उठालो जिसका दिल चाहे।

भरा सत्संग का दरियाव


2-ना कोई ऐसा तीरथ है

 जगत में दुसरो कोई

गया हरिद्वार में जाकर 

समझलो जिसका दिल चाहे

भरा सत्संग का दरियाव


3-ऋषि मुनियों ने भी गाई

 बहुत कुछ इसकी है महिमा

लिखा हर पोथियों में है 

पडालो जिसका दिल चाहे

भरा सत्संग का दरियाव


4-कहे कबीर लगन से

 गुरु सन्तो में जा करके

यँहा यमराज का बंधन

 छुडालो जिसका दिल चाहे।

भरा सत्संग का दरियाव

 नहालो जिसका दिल चाहे।


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