सतगुरु देव मनाया है
साखी -1 -ऐजी कबीर सब घट आतमा , और सिरजी सिरजन हार
अरे राम कहे सो राम सम , और रहता ब्रह्म विचार
2 - ऐजी सतगुरु आतम द्रष्टि हे , और इन्द्रि टिके ना कोय
अरे सतगुरु बिन सूझे नहीं और खरा दुहेला होय
3 - तो पूरा सतगुरु सेवता , और अंतर प्रगटे आय
अरे मनसा वाचा करमणा , और मिटे जनम के तार
कबीर भजन लिरिक्स
भजन
टेक-सतगुरु देव मनाया हो हमने , पूरा गुरु देव मनाया हे -----2 कैसे मनाये ----
अरे ऊग्यो भाण भला पीव आयो , अनंद उर में छाया हे। --सतगुरु देव मनाया हे
पुरे सतगुरु को मनाने के लिए हमारे चित में चौक को पुराने की जरूरत हे। बाहर चौक पुराने की जरूरत नहीं हे। सत के पाठ के ऊपर बैठने की जरूरत है , बाहरी सत के पाठ के ऊपर बैठने की जरूरत नहीं है। इसीलिए तो कहा है ---------
1 - अरे चित का चौक पुराया हो गुरुका , मांडण मांड मंडाया हे ----2
अरे प्रेम ,मगन हुई अनुभव जाजम , सत का पाठ बिछाया हे ----सतगुरु देव मनाया हे
जब गुरु के शब्द को हम अपने अंतर में स्थापित कर लेंगे , तो ही हमारी सच्ची पूजा , सच्ची आरती होगी। इसलिए बाहरी पूजा पाठ और आरती करने की अपेक्षा हम सूरत को शब्द के साथ मिलाने का प्रयास करे। और वो गुरु के मारपत ही संभव है। इसीलिए इस तरह की आरती करे ---------
2 - अरे सूरत सुहागण करे आरती , और गुरुगम ढोल बजाया है ----2
जब ऐसा गुरुगम का ढोल बजा देंगे तब क्या होगा
गगन मंडल में सेज पिया की सुरता पवन हिलाया है -----सतगुरु देव मनाया हे
इस तरह से जब सूरत सुहागन बन जाएगी , सूरत का शब्द के साथ मिलाप हो जायेगा तो ही समझियेगा की वो पीव जो सबके अंदर मौजूद है उसकी प्रत्यक्षनुभूती आपके अंदर ही होगी अपने आप में ही होगी। इसीलिए संतो ने कहा है --------
3 - अरे सूरत नूरत मिलत पिव दरशे , शिव में जिव समाया है -------2
जब सूरत और नूरत का मिलाप हो जायेगा , जिव और शिव का मिलाप हो जायेगा , तो फिर हम किस रँग महल में रहेँगे। और वो रंग महल सब का ऐक है। जहाँ पर ऐसा रंगीन फ़ाग खेलने की स्थिति जाहिर होती है इसीलिए ----
ऐ त्रिकुटी का रँग महल में सतगुरु फाग रमाया है ------सतगुरु देव मनाया हे
इसीलिए अंतिम में मोहनपुरी महाराज कहते है
4 - अरे ज्वालापुरी हो गुरु समरथ दाता , केवल पथ दर्शाया है -----2
ऐ मोहनपुरी स्वरूप समाधि , आप में आप लखाया है ----सतगुरु देव मनाया हे
इसलिए हर मानव मात्र को ऐसे सतगुरु को मनाने की जरूरत है अपने अंतर में संतो के शब्दों को चित्रित करने की जरूरत है , स्थापित करने की जरूरत है। इसीलिए तो संतो ने इस तरह की बात कही है।
आपको भजन कैसे लगे कृपया कमेंट करके जरुर बताये धन्यवाद।


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