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guru sarika dev hmare man bhave bhajan lyrics in hindi/गुरु सरिका देव हमारे मन भावे भजन लिरिक्स इन हिंदी

prahlad sinh tipaniya bhajan lyrics hindi


जो तन मन से गुरु के शब्दों के प्रति समर्पित हो गया तो निश्चित रूप से गुरु के शब्दों के मारपत हमारे जीवन के भरम हमारी ना समझी हमारे कर्मो की रेखा कटेगी। और गुरु वो हे जो हर मानव मात्र के भरम को कर्मो की रेखा को काटते हे अपनी समझ अपनी सेण के मारपत। इसीलिए इस शब्द में इस तरह से कहा हेकबीर भजन लिरिक्स.


                                 साखी -1 -एजी गुरु बसे बनारसी , शिष्य समंदर तीर 

                                               अरे ज्यों ज्यों गुरु गुण उपजे , तो निर्मल होत शरीर 


निर्मलता कब आएगी - जब हम गुरु के वचनो को अपने अंतर में आत्म सात करके उसकी प्रत्यक्षनुभूती करे तब। और ये बेहदी गुरु से ही संभव हे -हदी नहीं। जो अनेक प्रकार के जाती धरम मत पंथ और सम्प्रदाय की हदो में बांधते हे , वे उस बेहदी या रूहानियत से कैसे हमे जोड़ पायेंगे। इसीलिए सतगुरु कबीर केहते हे.

गुरु सरिका देव हमारे मन भावे


                                                    2-ये सब गुरु है हद के और बेहद के गुरु नाय 

                                                    अरे बेहद आपो उपजे , और अनुभव के घर माय 


इसीलिए इस पद में इस तरह से कहा हे ----

कबीर भजन लिखित

                                             भजन 

                                  टेक - अरे गुरु सरिका देव हमारे मन भावे सदा मन भावे 
                                                 गुरु काटे करम की जॉल्ड जिव सुख पावे     -------2 

इसलिए गुरु वो हे भरम को दूर करने वाले हे कर्मो की रेखा को काटने वाले हे , पर ये तभी संभव होगा , जब हम उनकी सेण को उनके इशारो को अपने जीवन में आत्मसात करे।  और उसकी प्रत्यक्षनुभूती करे तब। इसीलिए कहा हे ---------

गुरु सरिका देव हमारे मन भावे लिरिक्स


                                     2 - अरे वो गुरजी की सेण समझ कर ध्यावे समझ कर ध्यावे 
                             अरे वो नर चतुर सुजान जिव उलटावे , अरे वो नर संत सुजान मन उलटावे ---2 अरे गुरु सरिका


इसलिए गुरु की सेण के मारपत , जब हम अपने मन को अनेक प्रकार के विषय वासना ,अनेक प्रकार की भौतिक भोग विलासिता में फँसा हे , उसे मोड़ करके शून्य की और लाये , तब कहि समझियेगा की गुरु सेण को हमने लखा -जाना और अपने अंतर में उसकी प्रत्यक्षनुभूती की। और ये तब होगा जब हम अपने निज घर में आ जाये।  और हर इंसान का निज घर कौन सा हे इसके बारे में कहा हे ---------


                                    3 - अरे इंगला पिंगला नाड़ी सुषमणा को लावे सुषमणा को धावे 
                             भई अरद उरद रा बिच मन ठहरावे , हाँ आरा उरद रा बिच मन ठहरावे --2 अरे गुरु सरिका --


इसीलिए ये हर मानव मात्र का निज घर हे। जहाँ पर जाती धरम मत पंथ सम्प्रदाय का कोई अस्तित्व नहीं हे। और वो घर हे स्वाँस का। यहाँ पर जो इंगला पिंगला कहा हे वो हर इंसान का बायां और दाहिना नाक का स्वर हे जो चाँद और सूरज से भी जाना जाता हे ,या गंगा और जमुना के रूप में भी इसे निरूपित करते हे।कबीर दास भजन लिरिक्स इन हिंदीऔर इन दोनों के मध्य की जो स्थिति हे - वो सुषमणा हे वो सुखमणा हे जो भजन करने का निज घर हे।  और जब इस घर में आ जायेंगे तो वहाँ पर किसी प्रकार की मजहब किसी प्रकार का धरम मत पंथ सम्प्रदाय नहीं होता और इसीलिए तो कहा हे आगे 



                                         4 - अरे ऐक अखंडित नाथ चराचर ध्यावे चराचर ध्यावे 
                              भई सकल ब्रह्म के माय वेद यु गावे ,हाँ सकल ब्रह्म के माय वेद यु गावे गावे --2 अरे गुरु सरिका


इसीलिए वो परमात्मा वो ईश्वर अल्लाह वाहेगुरु जो अखंडित हे जो कभी खंडित नहीं होता जिसको कभी विभाजित नहीं किया जा सकता जिसको कभी बाँटा नहीं जा सकता वेद शास्त्र और पुराण भी इसी बात का पक्ष करते हे। और वो चर और अचर में सर्वांग सम स्थिति में मौजूद हे। इसी सेण के साथ जुड़ने का संकल्प संतो ने किया हे। इसीलिए अंतिम में यही निवेदन के साथ में ----------

गुरु सरीका देव हमारे मन भावे सदा मनवा

                                        5 - अरे बोल्या ईश्वर दास भरम ने भगावे भरम ने भगावे 
                          भई शीतल चरणों के माय सदा सुख पावे ,हाँ शीतल चरणों के माय सदा सुख पावे -2 अरे गुरु --

कबीर भजन डायरी

आपको भजन कैसे लगे कृपया कमेंट करके जरूर बताये।धन्यवाद।

 
guru sarika dev bhajan lyrics in hindi
An 1825 CE painting depicting Kabir weaving

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