गुरु वो जो मानव मात्र को रूहानियत से जोड़ते हे , और हमारे अंतर की कटुता को दूर करने का काम करते हे।
साखी - 1.ऐजी ध्यान मुलं गुरु मूर्ति ,और पूजा मुलं गुरु पदम
अरे मंत्र मुलं गुरु वाक्यम ,और मोक्ष मुलं गुरु कृपा।
और जब गुरु की कृपा होगी तब क्या होगा लाख-लाख वंदन तमने
2 .ऐजी गुरु बिन ज्ञान ना उपजे ,और गुरु बिन मिले ना मोक्ष
अरे गुरु बिना लखे कोई सत्य को ,और गुरु बिना मिटे ना दोष
हमारे जीवन की कमिया और खामिया ,जब तक सच्चे सतगुरु नही मिले तब तक दूर होना संभव नहीं। और सच्चे सतगुरु कोन? जो सत का भाव हर मानव मात्र के प्रति प्रवाहित करे। इसीलिए तो सतगुरु कबीर ने कहा हे ,
3 . सतगुरु तो सत भाव हे , और जो अस भेद बताय
अरे धन्य भाग धन शीश जेहि , जो ऐसी सुधि पाय।
कबीर भजन लिरिक्स
जब ऐसे सतगुरु मिल जाये और जो ऐसी सुधि पाले ,ऐसी समझ परख और पारख को आत्मसात करले ,तो ही हमारा जीवन धन्य होगा। परन्तु गुरु इस संसार में बहुत हे ,जो अनेक प्रकार से जीवो को दूर भी करने का काम करते हे। जबकि संतो का काम सबको मिलाने का हे तोड़ने का नहीं। क्योंकि दाता और नदिया एक समान होती हे और यही रेहणी और गेहणी गुरु की होती हे। इसीलिए तो सतगुरु कबीर ने कहा हे ---
4 .ऐजी दाता नदिया एक सम ,और सब कहु को देत
4 .ऐजी दाता नदिया एक सम ,और सब कहु को देत
हाथ कुम्भ जिसका जैसा हा ,वो वैसा ही भर लेत
हमारा भी ये दायित्व होता हे की हम भी हमारी चूक कमियों खामियों को दूर करे। इसीलिए कहा हे ----
5.अरे गुरु बिचारे क्या करे ,और जो शिष्य माहि चूक
अरे भावे ही परमोदिये ,जैसे बाँस बजाई फुक।
इसीलिए गुरु वो हे जो गम के सागर हे ,बोध के सागर हे। और हर इंसान के जीवन को संवारने का काम करते हे। इसीलिए हमारी चौरासी जो चार अंगुल की हे ,उससे मुक्त करने का काम सच्चे सतगुरु का होता। lakh lakh vandan tamne
भजन
टेक - लाख लाख वंदन तमने कोटि कोटि वंदन , गुरु गम का सागर तमने लाख लाख वंदन
गुरु गम का सागर तमने ,लाख लाख वंदन
क्यों लाख लाख वंदन -हम तो अज्ञानी जिव हे और जब गुरु की शरण में आये हे ,तो निश्चित रूप से गुरु हमारी अंतर की कटुता तो दूर करेंगे ,और ज्ञान का दीपक प्रज्ज्वलित करेंगे ,इसीलिए कहा हे --------
कबीर भजन डायरी
1.अज्ञान जिवडो गुरूजी चरणो में आयो ,अज्ञान जिवड़ो गुरूजी चरणों में आयो
ज्ञान को दीपक गुरूजी ,जलाई हो दीजो ,गुरु गम का सागर तमने लाख लाख वंदन
चौरासी लाख योनियों में जिव जब भटककरके गुरु की शरण में आता हे ,तो निश्चित रूप से वो चौरासी लाख योनी को काटते हे ,जो विषय वासना की हे। इसीलिए ----------
2.लख हो चौरासी में जिवडो भटकिने आयो , लख हो चौरासी में जिवडो भटकिने आयो
अबकी चौरासी गुरूजी , छुड़ाई हो दीजो --गुरु गम का सागर तमने लाख लाख वंदन
इसलिए सच्चे सतगुरु ,हर इंसान के मानव मात्र के जीवन को संवारने का काम करते हे। इसीलिए तो ये विनती ये प्रार्थना हे सेवक की ------------------
3.डूबत डूबत हो गुरूजी आपने बचाया , डूबत डूबत हो गुरूजी आपने बचाया
अबको जीवन हो गुरूजी ,सँवारी हो दीजो ---- गुरु गम का सागर तमने लाख लाख वंदन
इसीलिए हर सच्चे सेवक की अपने गुरु के प्रति यह श्रद्धा सुमन समर्पित हे ,इसीलिए ------------
लाख लाख वंदन तमने कोटि कोटि वंदन गुरु गम का सागर तमने लाख लाख वंदन
4.ईणा हो सेवक की गुरूजी अरज गुसाई , ईणा हो सेवक की गुरूजी अरज गुसाई
छाप - आवागमन को बंधन , छुड़ाई हो दीजो गुरु गम का सागर तमने लाख लाख वंदन
कबीर भजन लिखित
आपको भजन केसे लगे कृपया कमेंट करके जरूर बताये। धन्यवाद

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