दोहा -1 .गुरु बिन माला फेरते ,और गुरु बिन करते दान
गुरु बिन सब निष्फल गया ,चाहे बाचो वेद पुराण
2 .गुरु की वाणी अटपटी ,और झटपट लखि ना जाय
अरे जो जन झटपट लखि लहे ,वाकी खटपट ही मिट जाय
भजन
टेक -गुरु जी के चरणों में रेणा भाई चेला थारे ,दूणी दूणी वसतु मिले रे हेरे ऐ जी
म्हारा साधो भाई सुन्न में सुमरले सूरत से मिलो रे , सब घट नाम साधो ऐक हे रे जी
1 .हाँ दई रणुकार थारी नाभी से उठता , दई दई डंको चढ़े रे हे रे ऐ जी
नाभी पंथ साधो घणो रे दुहेलो ,सब रंग पकड़ फिरे रे -सब घट नाम साधो। ..........
2 .हाँ नाभी पंथ साधो उल्टा घुमाओ तो ,मेरु दण्ड खुले रे हे रे ए जी
मेरु दण्ड साधो पिछम का मारग ,सीधी बाट धरो रे -सब घट नाम साधो। ...............
3 .दिन नहीं रेण दिवस नहीं रजनी ,ना कोई सूरज तपे रे हे रे ऐ जी
गाजे ना घोरे बिजली ना चमके ,अमृत बून्द झड़े रे - सब घट नाम साधो। .................
4 .बिना डंका से झालर बाजे बाजे,झीणी झीणी आवाज सुणो रे हे रे ऐ जी
घड़ियाल शंख बांसुरी बीणा ,अनहद नाद घूरे रे -सब घट नाम नाम साधो। .............
छाप - 5 .बिना बस्ती का देश अजब हे,ना वहाँ काल्ड पड़े रे हे रे ऐ जी
कहे कबीर सुणो रे भाई साधो ,शीतल अंग करो रे -सब घट नाम साधो। ...............


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