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मारग झीना झीना / marag jhina jhina

टेक- मारग झीना झीना 

कोई बिरले जन ने जाना ।।


1- पंचतत्व त्रिगुण से न्यारा

मन बुध्दि पहुँचेना ।

सुर्ती भी पीछे चल आई

वहाँ कही तार पुरैना ।।


2- अर्ध ऊर्ध्व महाशून्य से न्यारा

निजघर पार वखाना ।

वेति नेति कर वेद पुकारे

महिमा उने न जाना ।।


3- अद्भुत अतीत सबसे न्यारा

आदि अलख ठिकाना ।

अगम अपार पार ना पावे

अनुभव ज्ञान समाना ।।


4- प्रेमिचन्द गुरु अनुभव दाता

सन्मुख किया निशाना ।

आत्माराम कहे सुन भाई साधौ

नही आवे नही जाना ।।


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