टेक- ऐसा मेरा सतगुरु शबद सुणाया
सोहं सोहं कहे समझाया
बिना जिव्हा से गुण गाया रे
ऐसा मेरा सतगुरु शबद सुणाया ।।
1- मूल कमल से पवन रोका
षट चक्कर पर लाया
नाभी कमल बीच नागिन सूती
ज्याकों जाय जगाया
ऐसा मेरा सतगुरु शबद सुणाया ।।
2- नागिन मार नाभि से चलिया
मेरुदण्ड चढ़ाया
बंकनाल की घाटी होकर
दशवा जाय समाया
ऐसा मेरा सतगुरु शबद सुणाया ।।
3- दशवा देव दीदार दरशिया
जगमग ज्योत जगाया
अष्ट पहर आनन्द सुख पाता
हंसा निर्भय थाया
ऐसा मेरा सतगुरु शबद सुणाया ।।
4- सच्चिदानंद मिल्या गुरु पूरा
अचल मार्ग बताया
दास गोपाल शरण सतगुरु की
फेर काल नही खाया
ऐसा मेरा सतगुरु शबद सुणाया ।।
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