खुदा की खुदाई
कहानिया हिंदी में -
प्रमोद अपने माता - पिता का बहुत ही लाड़ला था । दोनों ही माता - पिता उस पर जान छिड़कते थे । माता उसकी देख - रेख बड़े ही सुन्दर ढंग से किया करती थी । प्रभु परमेश्वर के प्रेम और भय में वह दिन - प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था । पढ़ाई समाप्त करने के बाद वह फौज में भर्ती हो गया । जाते समय मां ने उसे एक बहुत ही सुन्दर बाईबिल दी थी । और कहा - बेटे इसको बराबर अपने पास रखना और इसे.सदा पढ़ते रहना , कठिनाई और परेशानी में इससे तुम्हें बड़ी सहायता मिलेगी । प्रमोद मां की शिक्षाओं पर सदा चला और उसने अपने जीवन में इस बात का अनुभव किया कि जब कभी उसके सामने कोई कठिनाई , कोई भी परेशानी आई , उसने बाईबिल को पढ़ा और प्रार्थना की और इससे उसे बड़ी शक्ति और सहायता मिली ।
कहानिया हिंदी में अच्छी अच्छी -
कुछ सालों के बाद मां ने प्रमोद का विवाह कर दिया । उसकी पत्नी सीमा भी प्रभु की विश्वासिनी थी । दोनों ही बहुत खुश थे । जब प्रमोद काम पर बाहर चला जाता तो सीमा घर में अकेली रह जाती तो वह अक्सर परमेश्वर की स्तुति और प्रशंसा में कुछ गीत लिखा करती थी और प्रमोद उन्हीं गीतों को गाया करता था । प्रमोद को बांसुरी बजाने का भी बड़ा शौक था । एक बार सीमा ने उसे सुन्दर सी बांसुरी उसके जन्मदिन पर भेंट दी थी जिस पर उसने अपना और प्रमोद का नाम लिखवा लिया था । इस प्रकार वह दोनों हंसी - खुशी अपना जीवन बिताने लगे । कुछ समय बाद परमेश्वर ने उन्हें एक सुन्दर - सा बेटा दिया । बेटे को पाकर दोनों ही बहुत खुश थे उन्होंने उसका नाम दीपु रखा । वे बड़े नाज और प्यार से उसका पालन - पोषण करते थे।
कहानिया हिंदी में नई-
एक बार प्रमोद छुट्टियों में घर आया हुआ था कि अचानक हेडऑफिस से सूचना आई कि शत्रुओं ने बड़ा जोरदार हमला कर दिया है । और उसे फौरन ही अपनी टुकड़ी के साथ बॉर्डर पर पहुंचना है । इस खबर को सुनकर सीमा घबरा गई और रोने लगी ।
प्रमोद ने उसे हिम्मत दिलाई और कहा - निराश न हो सीमा ! परमेश्वर की इच्छा हुई तो हम जल्दी ही फिर मिलेंगे । तुम मेरे लिए प्रार्थना करती रहना और बेटे को देख - रेख भली प्रकार करती रहना । प्रमोद ने प्यारी मां की बाईबिल अपने साथ ली और सबसे बिदा लेकर वहां से चला । सीमा के दिन इंतजार में कटने लगे । जब - जब प्रमोद का पत्र आता वह परमेश्वर का धन्यवाद करती ।
इस प्रकार बहुत दिनों तक उसे प्रमोद के पत्र मिलते रहे । अचानक पत्र आने बंद हो गए । सीमा घबड़ा गई , ' नहीं प्रभुजी नहीं , मेरे प्रमोद को तू सही - सलामत रखना , उसकी रक्षा करना । एक सुबह जैसे ही सीमा हाथ - मुंह धोकर बाहर निकली । फौजी कपड़ों में प्रमोद के मित्र कमल को दरवाजे पर उदास खड़ा देखा । सीमा का दिल जोर से धड़कने लगा , वह घबड़ाकर बोली । भइया , क्या खबर लाए हो ।
प्रेरणादायक कहानिया -
कमल गुमसुम खामोश खड़ा रहा । बड़ी देर के बाद उसने अपना मुंह खोला और बड़े धीमे स्वर में कहा - सीमाजी प्रमोद लापता है शायद वह ..। नही ... नहीं ऐसा नहीं हो सकता मेरा प्रामोद को कुछ नहीं हो सकता । सीमा पागलों की तरह जोर - जोर से चिल्लाकर रोने लगी । अपने बेटे दीपू को लिपटा लिया । मेरे बेटे यह क्या हो गया , अब हम कहां जाएंगे ।
कमल ने धीरज बंधाया , ' सीमा हिम्मत रखो , देखो शत्रु बराबर आगे बढ़ते आ रहे हैं । तुम दीपू को यहां से फौरन कहीं और चली जाओ । ' यह कहकर कमल वहां से चला गया । सीमा की आंखों के सामने अंधेरा छा गया - क्या हो गया , कहां जाऊं , वह बड़ी बेचैन थी । चन्द ही दिनों के अन्दर सीमा ने अपनी जरूरत को थोड़ी - सी चीजें इकट्ठी की । दीपू और अपने यहां के एक बहुत ही पुराने नौकर को लेकर वहां से चली गई ।
मोटिवेशनल कहानिया -
उसे यह डर था कि कहीं शत्रु उसके पति के कारण उसको भी दुःख न पहुंचाए इसलिए उसने अपनी साड़ी का एक छोटा टुकड़ा नदी के किनारे एक पेड़ पर लटका दिया ताकि शत्रु उसे मरा हुआ जानकर उसकी खोज न करे । धीरे - धीरे काफी दिन बीत गए । सीमा को प्रमोद की कोई खबर नहीं मिली और अंत में सीमा ने प्रमोद को मरा हुआ जानकर अपने सीने पर पत्थर रखकर सब कर दिया । किन्तु प्रमोद जैस ही उसने शत्रुओं की कैद से छुटकारा पाया वह फौरन अपनी पत्नी और दीपू की खोज में निकल पड़ा । वह सीधा अपने घर पहुंचा , पर अफसोस । वहां कोई नहीं था । उसने इधर - उधर सीमा की तलाश करने की कोशिश की । पास - पड़ोसियों से पूछा परन्तु उसे कोई पता नहीं चला वह वहीं सिर पकड़कर बैठ गया है प्रभु ये क्या हो गया मेरी सीमा मेरा दीपू कहां चले गए ।
तरह - तरह के विचार उसके मन में आने लगे । वह परेशान हो गया , वहां से उठा और सिर झुकाए धीमे कदमों से नदी के किनारे आ पहुंचा जो उसके घर के नजदीक ही बहती थी । अभी वहां पहुंचा ही था कि उसे एक पेड़ से साड़ी का टुकड़ा लटकता दिखाई दिया । उस टुकड़े को उसने ध्यान से देखा उसे याद आया ' कि ऐसी ही साड़ी सीमा के पास भी थी । उसने दौड़कर उस टुकड़े को उठा लिया , उस टुकड़े के एक काने पर अंग्रेजी का ' एस ' कढ़ा देखकर उसे विश्वास हो गया कि यह सीमा की साड़ी का ही टुकड़ा है क्योंकि सीमा अपने प्रत्येक साड़ी के कोने पर ' एस ' काढ़ा करती थी । उसकी चीख निकल गई । क्या मेरी सीमा इस नदी में ? नहीं ऐसा नहीं हो सकता । प्रभु मेरी सीमा और दीपू से मिला दे । प्रमोद ने सीमा और दीपू को खोजने की बहुत कोशिश की किन्तु निराशा ही उसकी हाथ लगी । उसका मन संसार से उचट गया । उसने वहीं नदी के किनारे एक कुटिया बनाई और उसमें रहने लगा । धीरे - धीरे कई साल गुजर गए । सीमा का बेटा दीपूअब काफी बड़ा हो गया था । सीमा ने उसे अपनी सारी दुःख भरी कहानी सुनाई और वह गीत भी जो प्रमोद को बहुत पसन्द था और जिसे वह बहुत गाया करता था । दीपू को सिखाई मां की इस कहानी का दीपू के मन पर बहुत असर हुआ ।
शिक्षाप्रद कहानिया -
वह अक्सर प्रभू से प्रार्थना करता था - ' हे प्रभु हमारे पिता को हमसे मिला दे । ' यह बहुत अधिक उदास रहने लगा था और इन उदासी के क्षणों में वह एकांत में चला जाता था और उसी गीत को गाया करता जो सीमा ने उसे सिखाया था । यूं पढ़ - लिखकर दीपू जवान हो गया और नौकरी करने लगा और इस प्रकार वह अपनी प्यारी मां का सहारा बन गया । संयोग से नौकरी उसी शहर में मिली जहां वह लोग प्रमोद के साथ रहा करते थे । किन्तु समय का फाहा भी उस घाव को न भर सका तो उसके पिता के गुम होने से उसके दिल पर लगा हुआ था ।
वह अभी भी अक्सर उदास हो जाता था और एक दिन इसी उदासी के आलम में वह उसी नदी के किनारे आ पहुंचा जो उसके पुराने घर के पास बहा करती थी । आज वह बहुत दुःखी और परेशान था । वह एक पत्थर पर जाकर बैठ गया और गीत गाना शुरू कर दिया । शाम के उस खामोश वातावरण में उसी दर्दभरी आवाज दूर - दूर तक गूंजने लगी । प्रमोद अपनी कुटिया में लेटा हुटा था जो जब परिस्थितियों के कारण अपनी उम्र से अधिक बूढ़ा दिखने लगा था ।
बच्चो के लिए अच्छी कहानिया -
रोते - रोते उसने अपनी आंखों की रोशनी भी बहुत कम कर ली थी । इसी गीत को सुनकर वह चौंक गया यह ... कौन इस गीत को गा रहा है । यह गीत तो सिवाए सीमा के और किसी को नहीं आता । वह जल्दी से कुटिया के बाहर आया और उस युवक पास गया जो इस गीत को गाने में खोया हुआ था । प्रमोद ने आगे ' बढ़कर बड़े प्रेम से उसके कंधे पर हाथ रखा और बोला - ' बेटे तुम कौन हो ?
यह गीत तुम्हें किसने सिखाया ? दीपू ने गाना बंद कर दिया और बड़े गंभीर स्वर में कहा - बाबा ये गीत मेरी मां ने मुझे सिखाया है । जब मैं बहुत परेशान हो जाता हूँ तो इसी गीत को गाकर तसल्ली पा लेता हूं ।
बेटे तुम्हारा नाम क्या है ? बाबा ने पूछा ।
' दीपू - उसने धीरे से कहा ।
' क्या - क्या कहा तुमने , फिर से बोलो प्रमोद कांपते स्वर में कहा-
' हां बाबा मेरा नाम दीपू है ।
' और तुम्हारी मां का क्या नाम है बेटा ?
' दीपू ने उत्तर दिया - ' मेरी मां का नाम सीमा है ।
' यह सुनकर प्रमोद सिर से पैर तक कांप गया । उसकी आंखों के सामने उसकी पत्नी सीमा और उसके प्यारे बेटे दीपू का चेहरा घूम गया । क्या मेरी पत्नी सीमा और मेरा बेटा दीपू ... पर नहीं , यह कैसे हो सकता है ? उसने तो इस नदी में डूबकर अपनी जान दे दी थी । दीपू बड़े ध्यान से हर एक शब्द को सुन रहा था । उसने आगे बढ़कर कहा -
क्या हो गया बाबा ? क्या तुम्हारी तबियत खराब हो गई है । ' प्रमोद ने कहा ,
नहीं बेटा - नहीं यह सब मेरी किस्मत का खेल है ।
क्या हुआ बाबा कुछ तो बताओ । ' दीपू की व्याकुलता बढ़ती जा रही थी । प्रमोद ने बड़े धीमे स्वर में अपनी और बीती कहानी उसे सुना दी । किस प्रकार वह अपनी पत्नी और बेटे से बिछुड़ गया था । इन शब्दों को सुनते ही दीपू को अपनी मां की बताई हुई सारी बातें याद आ गई , उसका दिल खुशी से झूम उठा , वह एकदम अपने पिता के गले से लिपट गया ।
कहानिया
बाबा मैं ही तुम्हारा दीपू हूं ... यह देखो . • यह बांसुरी इस पर तुम्हारा और मां का नाम लिखा है ... प्रमोद खुशी से पागल हो उठा , आज 20 साल बाद मेरी यह लम्मी तलाश पूरी हो गई है । दोनों के हदय धन्यवाद से भरे हुए थे उसी जगह दोनों ने प्रभु को धन्यवाद किया । हे प्रभु तेरी अजीब लीला है , तुम सचमुच अपने विश्वासियों से प्रेम करता है । यह दुःख ओर परेशानी हमें तेरे कितने निकट ले आई है । बीस साल के बाद एक बार फिर प्रमोद अपने बेटे ओर अपनी पत्नी से जा मिला और एक बार फिर से वह अपना एक छोटा - सा सुखी घर बना सका । परमेश्वर हमारा शरण - स्थान और बल है , संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक ।
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