कबीर भजन लिरिक्स
साखी-ऐजी विषय वासना में उरझ करी
जनम गँवाया बाद
अब पछतावा क्या करे
तू निज करनी कर याद
2-ऐजी के खाना के सोवना
और ना कोई चित
सतगुरु शबद बिसारिया
और आदि अंत का मित
3-ऐजी दिवस गँवाया खाई के
और रेण गंवाई सोय
तेरा हिरा जनम अमोल था
कोढी बदले खोय
टिपानिया भजन लिरिक्स
भजन
टेक-घणा दिन सो लियो रे
अब तू जाग मुसाफिर जाग
1-पेले सोयो माता के गरब में
औंधे मुख तू झुला
कोल किया था भजन करूंगा
बाहर आकर भुला
जनम थारो हो गया रे
अब तू जाग मुसाफिर जाग
घणा दिन सो लियो रे
अब तू जाग मुसाफिर जाग
2-दूजे सोयो माता की गोद में
अरे दूध पिया मुसकाया
{ या मल मूत्र तेरा धोया }
बेहन बुआ थारी लाड़ लड़ावे
झूला दिया बंधाई
बँधावो थारो हो गयो रे
अब तू जाग मुसाफिर जाग
घणा दिन सो लियो रे
अब तू जाग मुसाफिर जाग
3-तीजे सोयो तिरया की सेज पे
बैंया में बैंया डाली
मोंह मद में भूल गयो तू
भूल गया सब कोल
ब्याव थारो हो गयो रे
अब तू जाग मुसाफिर जाग
घणा दिन सो लियो रे
अब तू जाग मुसाफिर जाग
छाप-चिता को सोणो बाकी रईग्यो
तू तो सब जग लियो हे सोई
कहे कबीर थारे जागण की रे
जाग्यो नहीं गँवार
मरण थारो हो गयो रे
अब तू जाग मुसाफिर जाग
घणा दिन सो लियो रे
अब तू जाग मुसफ़िर जाग
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